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Monday, 16 February 2015
Friday, 13 February 2015
उड़ान-2014-15
उड़ान-2014-15
बत्तख की चिन्ता
एक बत्तख नदी में तैर रही थी। वह बहुत चिन्तित थी। तैरते हुए बत्तख आकाश में उड़ते पक्षियों को देख रही थी। वह बार-बार यही सोच रही थी कि वह आकाश में अन्य पक्षियों की तरह आखिर क्यों नहीं उड़ सकती। बत्तख को उदास देखकर एक आदमी आया और उससे बोला कि ‘तुम क्यों उदास हो?’ बत्तख ने कहा कि- वह इसलिए चिन्तित है कि वह आकाश में अन्य पक्षियों की तरह क्यों नहीं उड़ सकती है? आदमी ने बत्तख से कहा कि सबको प्रकृति ने कुछ न कुछ विशेषता दी है। किसी को उड़ने की, किसी को पेड़ों पर चढ़ने की, किसी को दो पैरों पर चलने की तो किसी को कुछ और....। तुम्हारे पास पानी में तैरने की अद्भुत शक्ति है, इसी में तुम्हें खुश रहना चाहिए। बत्तख नहीं मानी, वह तो उड़ने के लिए जिद कर रही थी। आदमी ने बत्तख से कहा कि वह पेड़ पर चढ़कर दिखाये, बत्तख पेड़ पर चढ़ने लगी परन्तु गिर गई, वह फिर चढ़ी और फिर गिर गई। वह कई बार चढ़ी और गिर गई उसके चोट भी लग गई तब उसकी समझ में आ गया कि आदमी ठीक कह रहा है। जिसके पास जो गुण है उसी में खुश रहना चाहिए। बत्तख की समझ में यह बात आ गई और उसकी चिन्ता दूर हो गई।
-शिवम पाण्डेय
कक्षा 9 अ
उड़ान-2014-15
== हाइबुन ==
एक कछुआ और लोमड़ी आपस में दोस्त थे। एक दिन नदी के किनारे दोनों आपस में बातचीत कर रहे थे। उसी समय एक तेंदुआ वहाँ आ गया। तेंदुए को देखकर लोमड़ी भाग गई लेकिन कछुआ भाग नहीं पाया। कछुआ बहुत डर गया और तेंदुए से छोड़ देने के लिए गिड़गिड़ाने लगा। लेकिन तेंदुआ कछुए को छोड़ने को तैयार नहीं हुआ तभी लोमड़ी वापस आ गई और कछुए से बोली कि ‘तुम इसे खा नहीं सकते’ तेंदुए ने कहा कि क्यों नहीं खा सकता ? लोमड़ी ने कहा कि- ‘कछुए का खोल बहुत कठोर है यदि इसे पानी में डाल दो तो फिर इसका खोल नरम हो जायेगा फिर तुम इसे आसानी से खा लेना।’
तेंदुए ने कछुए को नदी के पानी में डाल दिया। फिर क्या था, कछुआ पानी में जल्दी से अन्दर चला गया और लोमड़ी भी वहाँ से भाग गई। तेंदुआ हाथ मलता रह गया। लोमड़ी और कछुआ दोनों खुशी से रहने लगे।
पक्की मित्रता
लोमड़ी-कछुआ की
मूर्ख तेंदुआ
-सुजाल विश्वास
कक्षा 7 अ
उड़ान-2014-15
झाड़ी के बीच
हो रही है आहट
अरे ! पतंगा
000
झूमने लगे
हवा पानी से पेड़
मेढ़क खुश
-सत्यम
कक्षा 7 अ
उड़ान-2014-15
== हाइबुन ==
कुछ दिन पहले मेरा जन्मदिन था। जन्मदिन से एक दिन पहले मैं स्कूल से अपने घर लौटा तो मेरे पिता जी ने मुझे एक प्यारा सा तोता तोहफे में दिया। वह बहुत ही प्यारा था, उसे मैंने अपने दोस्तों को दिखाया सभी ने उसे बड़े प्यार से देखा। तोते ने सभी के सामने अपनी लाल चोंच से पानी पिया। वह टें टें करके बालता कभी कभी सीटी भी बजा लेता। कुछ दिनों के बाद उसने कुछ शब्द भी बोलने सीख लिये। मैं अपने तोते के साथ बहुत खुशी से रहता हूँ परन्तु कभी-कभी सोचता हूँ कि शायद मेरा तोता अपने परिवार से अपने जंगल से बिछुड़ कर दुखी होगा, शायद उन्हें याद करता होगा। परन्तु मैं अपने तोते के साथ बहुत खुश हूँ।
मिला है तोता
हँसता-खेलता हूँ
तोते के साथ
-अभिषेक कुमार प्रसाद
कक्षा 9 अ
उड़ान-2014-15
गंगा बहुत पवित्र नदी है
जल गंगाजल कहलाता है
कभी न जल में कीड़े पड़ते
कितने जीव-जन्तु हैं रहते
लोग नहाने इसमें जाते
करके स्नान पवित्र हो जाते
कोई इसमें राख डालता
कोई मृत पशुओं को बहाता
ऐसे लोगों को समझाओ
गंगा माँ को स्वच्छ बनाओ
-जगदीप कुमार मौर्य
कक्षा 10 स
जल गंगाजल कहलाता है
कभी न जल में कीड़े पड़ते
कितने जीव-जन्तु हैं रहते
लोग नहाने इसमें जाते
करके स्नान पवित्र हो जाते
कोई इसमें राख डालता
कोई मृत पशुओं को बहाता
ऐसे लोगों को समझाओ
गंगा माँ को स्वच्छ बनाओ
-जगदीप कुमार मौर्य
कक्षा 10 स
उड़ान-2014-15
गाँव-गाँव और शहर-शहर में
जारी रहे सफाई अभियान
हम भी मिलकर करें
अपना विद्यालय साफ
एक दिन हो जायेगा स्वच्छ
सारा हिन्दुस्तान
-मो० खतीब अली
कक्षा 10 अ
जारी रहे सफाई अभियान
हम भी मिलकर करें
अपना विद्यालय साफ
एक दिन हो जायेगा स्वच्छ
सारा हिन्दुस्तान
-मो० खतीब अली
कक्षा 10 अ
उड़ान-2014-15
देखा सपना
पृथ्वी वृक्षों का भण्डार है
नींद खुली तो देखा
प्रदूषण की मार है
000
फौजी हूँ बना मैं
देश के दुश्मनों से लड़ रहा हूँ
नींद खुली तो
आठवीं में पढ़ रहा हूँ
000
सपने में खा रहा था चाकलेट मैं
पापा ने उठाया चाकलेट हाथों में थमाया
तब पता चला
सपने भी सच होते हैं
-अभिजीत
कक्षा 8 द
उड़ान-2014-15
मेरे पिता जी
बहुत गरीब हैं, पर
मुझे जाना है स्कूल
-शुभम राना
कक्षा 7 स
उड़ान-2014-15
एक लड़की खेल रही है
फूलों के साथ
आस-पास उड़ रही है तितलियाँ
-समीर राजा
कक्षा 8 स
उड़ान-2014-15
रंगीन पेड़ों का जंगल
बर्फ की नदी
बह रही है शांत भाव से
-बैजनाथ
कक्षा 7 अ
उड़ान-2014-15
चिड़िया की बच्ची
पानी से निकली
सुखा रही है अपने पंखो को
-गौतम
कक्षा 7 ब
उड़ान-2014-15
शहर से हुए दूर
कुछ दिन बाद आये तो देखा
शहर ही बदल गया
-रिक्षांत
कक्षा 9 अ
उड़ान-2014-15
टिड्डे हो गये
एक खेत में जमां
शाम होते ही
-कुलदीप सिंह
कक्षा 9 द
उड़ान-2014-15
हरी घास से नमी लेना
चैन से उस पर सोना
कितना हरा होता है
ये घासों का मेला
-रितिक कुमार
कक्षा 7 अ
उड़ान-2014-15
मैं बैठा था उदास छत पर
सोच रहा था बीते कल पर
अचानक वारिश की बूँदें गिरीं मेरे ऊपर
मैं नहाने लगा सब कुछ भूलकर
-मनमोहन सिंह
कक्षा 10 ब
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